गाभिन पशु को आहार में क्या क्या खिलायें : What to Feed Pregnant Animal in Diet
गाभिन पशु को आहार में क्या क्या खिलायें : What to Feed Pregnant Animal in Diet, सामान्य तौर पर पशुओं को आहार उनके शारीरिक भार और कार्य के अनुरूप दिया जाता है. परंतु मादा पशु को गर्भावस्था के दौरान भ्रूण का विकास तथा माता के पोषण हेतु गाभिन पशुओं को अधिक पौष्टिक, सुपाच्य तथा अधिक भोजन देंने की आवश्यकता होती है. ऐसा नहीं करने पर भ्रूण का विकास ठीक ढंग से नहीं हो पाने के कारण कमजोर बछड़े पैदा होना, मादा पशु में दुर्बलता आ जाना एवं दूध उत्पादन क्षमता में भी कमी आने जैसी विकृतियाँ आ जाती है.

एक पशुपालक को गाय, भैंस का पालन करते समय बहुत ध्यान देने की आवश्यकता पड़ती है. खासकर तब जब पशु गर्भावस्था में होती है तो उचित देखभाल की आवश्यकता होती है, इसमें किसी भी तरह की थोड़ी भी लापरवाही से पशुमालिक को आर्थिक नुकसान हो सकता है. गाय में गर्भकाल का समय 280 दिन का होता है और भैंस में गर्भकाल का समय 310 दिन का होता है. गर्भित मादा पशु में भ्रूण का विकास अंतिम तिमाही में बहुत तेजी से होता है. अतः मादा पशु को अतिरिक्त भोजन की आवश्यकता होती है जिससे भ्रूण का विकास सही ढंग से हो सके तथा साथ ही दूध उत्पादन को बढ़ाया जा सके. इसी समय मादा पशु को सुखा देना चाहिए अर्थात मादा पशु के दूध का दोहन बंद कर देना चाहिए. गर्भित मादा पशु को अच्छे पोषक तत्वों वाला दिए जाने वाले आहार जिसमें प्रोटीन 140 ग्राम, सम्पूर्ण पाचक तत्व (TDN) 70 ग्राम, कैल्शियम 12 ग्राम, फास्फोरस 7 ग्राम तथा विटामिन A 30 ग्राम का मिश्रण होना चाहिए. इस प्रकार के आहार को, सम्पूर्ण दाने का मिश्रण करके तैयार करना चाहिए. यह दाना को लगभग 1.5 किलोग्राम निर्वाह आहार के अतिरिक्त खिलाना चाहिए. ब्याने से 1-2 सप्ताह पहले गर्भित पशु को उच्च कोटि का चारा देना चाहिए जैसे – गेंहूँ का चोकर, सोयाबीन की खली, अलसी की खली आदि देना चाहिए.
पशु की गर्भावस्था की जाँच
मादा पशुओं में गर्भधारण की पहली पहचान, मादा पशु के मदचक्र का बंद होने से पता चल जाता है. मादा पशु में प्राकृतिक या कृत्रिम गर्भाधान के पश्चात् 18-21 दिन में पुनः मदचक्र में वापस नहीं आने पर पशु के गर्भधारण होने की ओर संकेत करता है परंतु यह विश्वसनीय प्रमाण नहीं होता है. कभी-कभी मादा पशु में गर्भाधान के पश्चात् गाभिन नहीं होने पर भी पुनः मद या गर्मी में नहीं आती है, ऐसे में पशु मालिक पशु के गर्भित हो जाने के धोखे में रहता है. इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न होना पशु के शरीर में हार्मोन्स का असंतुलन अथवा किसी अन्य जनन प्रक्रियाओं में गड़बड़ी की ओर इशारा करता है. अतः पशुपालक ध्यान दें की उस मादा पशु का गर्भाधान के 2-3 महीने में किसी जानकार, अनुभवी डॉक्टर या पशुचिकित्सक से गर्भ की जाँच करा लेना उचित होता है ताकि भविष्य में होने वाली आर्थिक नुकसान से बचा जा सके.
गाभिन पशुओं को दिये जाने वाले आहार
गाभिन पशुओं के आहार में उचित ध्यान देना पड़ता है क्योंकि गाभिन पशु को अपने जीवन निर्वाह, दूध देने के अतिरिक्त गर्भ में पल रहे बच्चे का सर्वांगीण विकास के लिये अत्यधिक पोषक तत्व तथा ऊर्जा की आवश्यकता होती है. गाभिन पशुओं में गर्भ का विकास गर्भावस्था के अंतिम तीन महीने में अधिक होता है. अतः पशु को गर्भावस्था के अंतिम तीन महीने में अच्छी और गुणवत्ता युक्त आहार देना चाहिए. गर्भावस्था के तीन महीने के बाद बच्चे का कंकाल तंत्र का विकास होने लगता है. उस समय गाय दूध देने की अवस्था में रहती है इसलिए गाभिन पशु को कैल्शियम की कमी न होने देवें. उन्हें पशु आहार के साथ कैल्शियम युक्त खनिज मिश्रण देना चाहिए. अंतिम तीन महीने में पशु ब्याने के बाद अच्छा दूध देने के लिये अपना वजन बढ़ाते हैं तथा शरीर में होने वाली पोषक तत्वों की कमी को पूरा करते है. इस समय यदि पशु को पोषक तत्व युक्त आहार नहीं दिया गया या पोषक तत्व की कमी रह गई हो तो निम्नलिखित परेशानियाँ हो सकती है.
1 . बछड़ा मृत या कमजोर पैदा हो सकता है.
2. ज्यादा दूध देने वाले पशु में प्रसव के बाद दुग्ध ज्वर जैसे बीमारियाँ हो सकती है.
3. पशु फुल दिखा सकती है अर्थात पशु में भाण या गर्भाशय बाहर निकल सकता है.
4. जेर या आंवर का नहीं गिरना.
5. बच्चेदानी में संक्रमण भी हो सकता है.
6. ब्याने के बाद दुग्ध उत्पादन पूर्व ब्यात के मुकाबले में काफ़ी कम हो जाना.
7. पशु का शरीर ब्याने के बाद दुर्बल और क्षीण हो जाना.
इसलिए गर्भावस्था के दौरान पशुओं को संतुलित और सुपाच्य खाना खिंलाना चाहिए. दाने में 40-50 ग्राम खनिज मिश्रण एवं 30 ग्राम लवण अवश्य मिलाना चाहिए. गर्भावस्था के दौरान पशुओं को प्रतिदिन दिए जाने वाले आहार का एक उदहारण निम्नलिखित है…….
1 . गर्भावस्था के दौरान गाभिन पशु को 25 – 35 किलोग्राम तक हरा चारा देना चाहिए.
2. गर्भावस्था के दौरान सुखा चारा 5 किलोग्राम तक देना चाहिए.
3. प्रतिदिन गाभिन पशु को 3 किलोग्राम तक संतुलित आहार देना चाहिए.
4. पशु को उच्च कोटि की खली 1 किलोग्राम प्रतिदिन देनी चाहिए.
5. गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास और अच्छे दूध उत्पादन के लिये गाभिन पशु के आहार में प्रतिदिन 50 ग्राम खनिज मिश्रण को देंना आवश्यक होता है.
6. पशुओं के आहार, दाने के साथ 30 ग्राम नमक अवश्य देवें.
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