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बकरीपालन कैलेण्डर क्या है : What is Goat Farming Calendar

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बकरीपालन कैलेण्डर क्या है : What is Goat Farming Calendar, बकरियों की अच्छे स्वाथ्य प्रबन्धन के लिये जरुरी होता है कि पशुपालक प्रतिदिन सुबह अपने बकरी के कोठे या बाड़े में जाकर जाँच करे. यदि कोई बकरी बीमार या अस्वस्थ दिखाई देती है तो उस बकरी को स्वस्थ बकरियों से अलग रखें. अन्यथा दूसरी बकरियों में रोग फैलने की सम्भावना रहती है. यहाँ पर बकरीपालन कैलेण्डर से तात्पर्य बकरियों का अलग-अलग मौसम और जलवायु में अपने बकरियों का देखभाल करके उन्हें स्वस्थ और रोगमुक्त कैसे रखें. क्योंकि बकरियों में संक्रामक बीमारी फैलने से एक बकरी के साथ-साथ बहुत सारे बकरियां बीमारी के चपेट में आ जाती है. कभी-कभी बकरियों में बीमारी का संक्रमण इतना फ़ैल जाता है कि समूह में बकरियों की मौत भी हो जाति है.

What is Goat Farming Calendar
What is Goat Farming Calendar

जनवरी महीने में बकरियों का ध्यान कैसे रखें

1 . जनवरी महीने या हिंदी कैलेण्डर के अनुसार पौष और माघ माह में शीत-लहर तथा पाले पड़ने की सम्भावना होती है. ऐसे में बकरियों को शीत-लहर और पाले से बचाना बहुत आवश्यक होता है.

2. शीत या पाले पड़ने की संभावना होने पर बकरियों के बाड़े में कृत्रिम प्रकाश या गर्मी का प्रबंध अवश्य करें.

3. कमजोर और रोगी बकरियों को बोरी की झूल बनाकर ओढ़ाएं. सर्दी से बचाने के लिये रात के समय बकरियों को छत के निचे या घास-फूस के छप्पर में रखें.

4. बकरियों को संकड़े या नाम स्थान में बन्द करने से एवं धुआं आदि ए गर्मी पहुचाने की कोशिश, न्युमोनिया से पीड़ित होने की सम्भावना को अधिक बढ़ाती है.

5. पशुओं को बांटा और पानी को गुनगुना करके देना चाहिए.

6. दुधारू पशुओं को तेल व गुड़ देने से भी शरीर का तापक्रम सामान्य बनाये रखने में सहायता मिलती है.

7. पशुओं के लिए अभी से चारे का संग्रहण अथवा उसको सही समय पर खरीद कर रखें, साथ ही पशुओं में लवणों की कमी नहीं होने पाये. इस हेतु लवण मिश्रण निर्धारण मात्रा में दाने या बांटे में मिलाकर दें.

8. अन्तः परजीवी नाशक घोल या दवा देने का भी सही समय जनवरी का महिना है.

9. पशुओं को बाह्य परजीवी से बचाने के लिये पशु-शाला में फर्श, दिवार आदि साफ़ रखें. अतः निर्गुण्डी, तुलसी या नीबू घास का गुलदस्ता पशुशाला में लटका दिया जाये, क्योंकि इसकी गंध बाह्य परजीवियों दूर रखती है. पशु शाला को कीटाणु रहित रखने के लिये नीम का तेल आधारित कीटनाशक का प्रयोग करें.

10. पशुपालकों को चाहिए कि अगर खुरपका-मुंहपका रोग (Foot and Mouth Disease), पी.पी.आर., गलघोटू (Hemorrhagic Septicaemia) , फढ़किया (Enterotoxemia), लंगड़ा बुखार (Black Quarter) आदि रोगों से बचाव के टीके नहीं लगवाएं हो, तो अभी लगवा लें. विशेष रूप से मेमनों को फढ़किया का टीका अवश्य लगवाएं.

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फ़रवरी महीने में बकरियों का देखभाल कैसे करें

1 . मौसम वैज्ञानिको के अनुसार फ़रवरी माह में अनेक स्थानों पर वर्षा होने की संभावनाएं रहती है. अतः पशुओं को भीगने से बचायें एवं बदल हटने पर सर्दी के आसार को देखते हुए पर्याप्त बचाव के उपाय करें.

2. पिछले जनवरी माह में दिए गए सर्दी के बचाव के उपाय फरवरी महीने में भी जारी रखें.

3. जो पशु जनवरी माह में नियंत्रित प्रजनन कार्यक्रम के तहत उपचार में थे, उनका अनुसरण फ़रवरी मंह में भी रखा जाये ताकि सभी पशु इस महीने तक गर्भित हो जाएँ.

4. नवजात मेंमनों को अन्तः परजीवी नाशक नियमित रूप से देवें.

5. मेंमनों को पी.पी.आर. का टीका लगवाएं.

मार्च महीने में बकरियों की देखभाल कैसे करें

1 . मार्च महीने में गर्मी में होने वाले रोगों के प्रति सावधानी रखनी चाहिए.

2. यदि मच्छर, मक्खी, चीचड़ आदि की संख्या में वृद्धि हो रही हो, तो इनसे फैलने वाले रोगों से बचाव करना चाहिए.

3. यदि पशुओं में दूध उत्पादन में कमी हो रही हो तो, पशु चिकित्सक द्वारा दूध और पेशाब दोनों की जाँच कराएँ.

4. ग्रीष्मकाल में हरे चारे हेतु मक्का, बाजरा एवं ज्वार की बोवाई करें.

5. बहुऋतुजीवी चारा घास जैसे हाइब्रिड नेपियर, गिनी घास इत्यादि इत्यादि की रोपाई पहले से तैयार खेतों में करें.

6. हरे चारे से सायलेज तैयार करें.

7. ब्याने वाले पशुओं को प्रसूति बुखार (Puerperal Fever) से बचाने के लिये खनिज मिश्रण 50-60 ग्राम प्रतिदिन देवें.

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प्रिय किसान भाइयों पशुओं की उपर्युक्त बीमारी, बचाव एवं उपचार प्राथमिक और न्यूनतम है. संक्रामक बिमारियों के उपचार के लिये कृपया पेशेवर चिकित्सक अथवा नजदीकी पशुचिकित्सालय में जाकर, पशुचिकित्सक से सम्पर्क करें. ऐसे ही पशुपालन, पशुपोषण और प्रबन्धन की जानकारी के लिये आप अपने मोबाईल फोन पर गूगल सर्च बॉक्स में जाकर सीधे मेरे वेबसाइट एड्रेस pashudhankhabar.com का नाम टाइप करके पशुधन से जुड़ी जानकारी एकत्र कर सकते है.

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